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Life Poetry/Quotes

6 Articles
Editor-in-Chief
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गरीबी  से उठा हूँ,गरीबी  का दर्द जानता हूँ,आसमाँ से ज्यादा जमीं की कद्र जानता हूँ। लचीला पेड़ था,झेल गया आंधियां,मैं मगरूर दरख्तों का हस्र जानता हूँ। मजदुर से अफसर बनना  आसान नहीं होता,जिंदगी में…

Editor-in-Chief
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जज्बातों की छलनी से जब दुःख की पीड़ा छनती है, भावुक कवि के भावुक मन से तब एक कविता बनती है। दिमाग वालों की दुनिया से जब भावुक इंसान की ठनती है, भावुक कवि के भावुक मन से तब एक कविता बनती है। किसी का दुःख देखकर जब  संवेदना  की नदी उफनती है, भावुक कवि के भावुक मन से तब एक कविता बनती है। शब्द सुमन फैले उपवन में भावुकता एक एक को चुनती है, भावुक कवि के भावुक मन से तब एक कविता बनती है।

Editor-in-Chief
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तारीफें बटोरना, वाहवाही लूटना, ये मेरी कविताओं का, मकसद कतई नहीं है, देश दुनिया को थोड़ा तो बदलूं, तो समझूंगा मेरी कविताएँ सफल हुई। वाहवाही-तारीफें तो कभी कभी लोग झूठी भी कर देते हैं, शब्दों से दिलों को छुलूं, तो समझूंगा मेरी कविताएँ सफल हुई। इश्क में पड़कर तो हर कोई करने लगता है शायरी, मजदुर,किसान और फौजियों का दर्द बता पाऊं, तो समझूंगा मेरी कविताएँ सफल हुई। धर्म,जात के नाम पर आज भी लड़ते हैं हम, मजहब से दिलों को जोड़ पाऊं, तो समझूंगा मेरी कविताएँ सफल हुई। मैं अदना सा इंसान, मेरी कोई औकात नहीं, देश को थोड़ा बेहतर बना पाऊं, तो समझूंगा मेरी कविताएँ सफल हुई।

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